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यूरोप में पुनर्जागरण । Europe mein Punarjagran- Renaissance ।। BPSC/PCS Classes by-Saksena sir



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यूरोप में पुनर्जागरण । Europe mein Punarjagran- Renaissance ।। BPSC/PCS Classes by-Saksena sir

सारांश व्याख्या ????
प्रशन- यूरोपीय पुनर्जागरण क्या है कब और कहां से आरंभ हुआ ?
उत्तर - पुनर्जागरण (Renaissance) पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ है- पुनः जागना । इसका मतलब यह होता है पहले कभी जगह हुआ था और किसी वजह से सो गया था और उसको फिर से जगाना है । लेकिन इतिहास के दृष्टिकोण से इसका शाब्दिक अर्थ होता है पुनर्जागरण का- मानवतावाद, संस्कार, पर्यावरण, क्षेत्र, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शहरी निर्माण, धर्म प्रचार, धर्म सुधार, पूंजीवाद, नवीन शहरीकरण, इन सभी को पुनः जागरूक कर विकाश करना ।

प्रशन- कब कहां और कैसे आरंभ हुआ यूरोपीय पुनर्जागरण ?
उत्तर- भारत में अरब देश और यूरोपीय देशों से स्थल मार्ग से व्यापार चलता रहा था लेकिन किसी कारणवश स्थल मार्ग पर बीच रास्ते में कुस्तुनतुनिया नामक स्थान पर तुर्कों का अधिकार हो गया तेरे को ने उस स्थान पर कब्जा कर लिया कुस्तुनतुनिया नामक स्थान पर । इससे अरब देशों व यूरोपीय देशों में भारत से व्यापार का कनेक्शन अवरुद्ध हो गया । इसी समस्या को दूर करने के लिए यूरोप वाले जल मार्गों का रास्ता ढूंढने के लिए प्रयास किया और अंत में सफल भी हुए हैं दरअसल जब वह जल मार्ग का रास्ता ढूंढ रहे थे तभी से यूरोप में पुनर्जागरण का आरंभ हुआ था उसी वक्त मानवतावाद विज्ञान प्रौद्योगिकी शहरी विकास समुद्री जहाज का निर्माण होना शुरू हो गया था माना जाता है जब पुनर्जागरण हो रहा था तब वहां के मानवतावाद में पहले से ही जागरण जागरण हो चुकी थी बस इसको पुनर्जागरण करना था इसकी शुरुआत की इटली से हुई थी जिसकी राजधानी रोम है ।

प्रशन- आखिरकार पुनर्जागरण में हुआ क्या था ?
उत्तर- इस पुनर्जागरण में पुर्तगाल एवं स्पेन ऐसे देश प्रमुख थे 15वीं और 16वीं शताब्दियों में मुद्रण और नक्शा बनाने का कार्य तेजी से विकसित हुआ तथा कंपास खगोलीय प्रेक्षेषणशाला, बम-बारूद इत्यादि जैसे प्रौद्योगिकी उपलब्धियों का खोज की गई । इस प्रकार पुनर्जागरण का अभ्युदय हुआ ।
कृषि में निवेश व विकास, कच्चे माल की आवश्यकता, नवीन बाजारों की प्राप्ति एवं विस्तार, धन-संपदा का आकर्षण, धर्मप्रचार- ईसाई धर्म का प्रचार, यूरोप में प्रथम व्यवस्था (सामंतवाद) के स्थान पर नवीन व्यवस्था (पूंजीवाद) के रूप में स्थापित किया । शायद यही वजह थी यूरोपीय देश भारत में आकर लूटमार करना ।
क्योंकि पुनर्जागरण में ही धनसंपदा का आकर्षण व सामंतवाद से पूंजीवाद में बदलना कि उसने प्रचार किया जा रहा था पुनर्जागरण के समय में और तभी यूरोप से पुर्तगाल देश से भारत में पहला व्यक्ति आया था व्यापार करने के लिए मकसद उसे कुछ और था व्यापार करने के बहाने आया था मकसद यही था कि जो हमारा धनसंपदा का आकर्षण है वह हमें पूर्ति हो सके और सामंतवाद से जो पूंजीवाद में बदलना है उसी के लिए भारत में आया था ताकि यूरोप के सभी व्यक्ति पूंजीवाद बन सके पूंजीपति बन सके ।


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